Sunday, August 4, 2019

इश्क है तो शक कैसा, अगर नहीं है तो फिर हक कैसा

चाहने की वजह कुछ भी नहीं,

बस इश्क की फितरत है बेवजह होना।



इश्क कर लीजिये बेइंतेहा किताबों से,

एक यही ऐसी चीज है जो अपनी बातों से पलटा नहीं करती।



इश्क है तो शक कैसा,

अगर नहीं है तो फिर हक कैसा।



कुछ तो शराफत सीख ले ऐ इश्क शराब से,


बोतल पर लिखा तो होता है मैं जानलेवा हूं।



मेरे इश्क से मिली है तेरे हुस्न को शोहरत ,

तेरा जिक्र ही कहां था मेरी दीवानगी से पहले।


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