Monday, April 27, 2020

वितरण का सीमांत उत्पादकता सिद्धान्त क्या है ? हिंदी

   दोस्तो आपको Scholors tech study में आपका स्वागत है आज हम आपके लिए एक नया टॉपिक जो कि अर्थशास्त्र से पूर्ण रूप से संबंध रखता है 

        वितरण का सीमांत उत्पादकता सिद्धांत 

सीमांत उत्पादकता सिद्धांत वितरण का एक सामान्य सिद्धांत है। इस सिद्धांत का प्रयोग उत्पादन के सभी साधनों के पुरस्कार निर्धारण के लिए किया जाता है। 

 सिद्धांत का सामान्य कथन एवं व्याख्या 

इस सिद्धांत के अनुसार उत्पादन के साधन की कीमत उसकी उत्पादकता पर निर्भर करती है इसका निर्धारण सीमांत उत्पादकता द्वारा होता है पूर्ण प्रतियोगिता कि स्थिति में किसी साधन का पुरस्कार अल्पकाल में उसकी सीमांत उत्पादकता से कम अथवा अधिक हो सकता है परंतु दीर्घकाल में सदैव ही साधन की सीमांत उत्पादकता के बराबर होता है स्टोनियर एवं हेग के शब्दों में उत्पादन के साधनों की कीमत निर्धारण की पूंजी सीमांत उत्पादकता के पास है तथा उत्पादन के साधन का पुरस्कार अनंत उसकी सीमांत उत्पादकता पर निर्भर करता है 

वितरण का सीमांत उत्पादकता सिद्धांत यह बतलाता है कि उत्पादन के साधनों का पुरस्कार उसकी उत्पादकता पर निर्भर करता है तथा वह सीमांत उत्पादकता के बराबर होता है उक्त कथन के प्रथम भाग के अनुसार उत्पादन के किसी भी साधन का पुरस्कार उसकी उत्पादकता पर निर्भर करता है उत्पादन साधनों की मां अन्य वस्तु की तरह से प्रत्यक्ष मांग नहीं होती है बल्कि अब तक सातवां वेतनमान होती है उत्पादन साधनों की वस्तु की मांग पर निर्भर करती है जिनका उत्पादन की सहायता से किया जा सकता है उत्पादन उत्पादकता के अनुसार करती है जिससे उत्पादन अधिक होती है उसकी कीमत भी अधिक होती है होती है उसकी कीमत भी कम होती है।

वितरण के सीमांत उत्पादकता सिद्धांत के अनुसार राष्ट्रीय आय में से प्रत्येक साधन को जो पुरस्कार मिलता है वह उसक सीमांत उत्पादकता के बराबर होता है संतुलन की स्थिति में उत्पादन के साधनों की सीमांत उत्पादकता हर प्रयोग में बराबर होती है

     सीमांत उत्पादकता तथा संबंधित धारणाएं

सीमांत उत्पादकता = किसी उत्पादन प्रक्रिया में उत्पादन के अन्य सभी साधनों की मात्रा को स्थिर रखकर किसी एक साधन की मात्रा में जब एक इकाई से वृद्धि की जाती है तो उससे वस्तु के कुल उत्पादन में वृद्धि होती है उस वृद्धि को परिवर्तन संसाधन की सीमांत उत्पादकता कहते हैं।
            सीमांत उत्पादकता को 3 वर्गों में बांटा जा सकता है (1) सीमांत भौतिक उत्पादकता (2) सीमांत आगम उत्पादकता तथा (3) सीमांत भौतिक उत्पादकता का मुद्रा में मूल्य।

(1) श्रीमान भौतिक उत्पादकता = जब उत्पादन के अन्य सभी साधनों को स्थिर रखकर किसी एक साधन की मात्रा में एक ही कान की वृद्धि की जाती है तो उसे वस्तु के कुल भौतिक उत्पादन में वृद्धि होती है उसे परिवर्तनशील साधन किसी महान भौतिक उत्पादकता कहते हैं किसी भी साधन की श्रीमान भौतिक उत्पादकता उत्पत्ति के परिवर्तनशील अनुपातों के नियम के अनुसार परिवर्तित होती रहती हैं उत्पादन उत्पत्ति के परिवर्तनशील अनुपातों के नियम के अनुसार परिवर्तित होती रहती है यह परम में बढ़ती हुई एक बिंदु पर उसके बाद घटती हुई होती है श्रीमान भौतिक उत्पादों को प्रदर्शित करने वाली रेखा किया करती अंग्रेजी के अक्षर की उल्टी आंख जैसी होती है उत्पादकता का चित्र निम्न प्रकार से है




(2) सीमांत आगम उत्पादकता =
उत्पादक अथवा फर्म के लिए सभी साधन की सीमांत उत्पादकता अधिक महत्वपूर्ण नहीं होती उसके लिए तो यह बात अधिक महत्वपूर्ण होती है कि उस अधिक उत्पादन को बेचने से उसे कितनी आगम प्राप्त होती है अतः किसी भी साधन को काम पर लगाते समय सदा इस बात में रुचि रखती है कि उस साधन की एक अतिरिक्त इकाई लगाने से उसकी कुल आगम में कितनी वृद्धि होगी अथवा उस साधन की सीमांत आगम उत्पादकता कितनी है एक उत्पादक द्वारा उत्पादन के अन्य साधनों की मात्रा स्थिर रखकर किसी परिवर्तनशील साधन की एक इकाई और कम लगाकर उत्पादन करने एवं उत्पादन को बेचने से उसकी कुल आग में जो वृद्धि होती है उसे परिवर्तनशील साधन की सीमांत आगम उत्पादकता कहते हैं


सीमान भौतिक उत्पादकता को सीमांत आगम से गुणा करने पर सीमांत आगम उत्पादकता प्राप्त होती है सूत्र के रूप में

             MRR= MPP×MR
             MRP= सीमांत आगम उत्पादकता 
             MPP= सीमान भौतिक उत्पादकता
             MR = सीमांत आगम 

(3) सीमांत भौतिक उत्पादकता का मुद्रा में मूल्य अथवा मुद्रा में सीमांत भौतिक उत्पादकता का मूल्य 

सीमांत उत्पादकता को वस्तु के मूल्य से गुणा करने पर मुद्रा में श्रीमान भौतिक उत्पादकता का मूल्य ज्ञात होता है।
  
                             VMP= MPP×PRICE OR (AR)
                             VMP=  मुद्रा में सीमांत भौतिक उत्पादकता का मूल्य

                             MPP= सीमांत भौतिक उत्पादकता
                             PRICE=  वस्तु का प्रति इकाई मूल्य 











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